Chumbak kaise banta hai?-Types of Magnet-पूरी जानकारी हिंदी में।

चुम्बक कैसे बनता है? इसे जानना अपने आप में एक दिलचस्प चीज़ है। आज से लगभग 600 साल पहले मैग्नीशिया नामक स्थान पर एक ऐसा पत्थर प्राप्त हुआ जिसमें लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ो को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण था। इसे मैग्नेट कहा गया। जिसे हिंदी भाषा में चुम्बक कहते हैं। यह मैग्नाइट अयस्क है जो की लोहे का आक्साइड होता है। 

आज मैं आपको चुम्बक की पूरी जानकारी देने के साथ-साथ ऐसे तथ्यों से रूबरू कराने वाला हूँ जो  अविश्वसनीय और अकल्पनीय हैं जिन्हें आपने कभी सुना भी नहीँ होगा। चुम्बक की बात करें तो प्राचीन काल के मनुष्यों ने धरती पर कई ऐसे पदार्थों की खोज की जो मनुष्य के शरीर तथा उनके कार्यो को प्रभावित करते हैं। और मनुष्यों के जीवन तथा उनके रोगों पर विशेष प्रभाव डालते हैं। मनुष्यों द्वारा एक ऐसे ही पदार्थ की खोज हुई जो चुम्बक कहलाता है। इसमें ऐसी शक्ति दिखाई दी जो लोहे से बनी वस्तु को अपनी और आकर्षित करती थी।

                                
Chumbak kaise banta hai

तो चलिए आप अगर जानना ही चाहते हैं कि चुम्बक कैसे बनता है तो मै आपको एक दिलचस्प चीज़ पहले ही बता देता हूँ और आगे की पोस्ट में हम इसके अन्य तरीकों के बारे में जानेंगे।

Chumbak kaise bnta hai?(चुम्बक कैसे बनता है?)

चुम्बक कैसे बनता है इसका एक आसान तरीका ये है कि अगर आप लोहे की किसी छड़ को कुछ समय के लिए उस दिशा में गाड़ दें जिस दिशा में एक स्वतंत्र चुम्बकीय सूई लटकती है। तो वह छड़ चुम्बक बन जाती है और उसमें चुम्बकत्व के गुण आ जाते हैं। वैसे आज के समय की बात करें तो चुम्बक का उपयोग अब चिकित्सा के क्षेत्र में भी होने लगा है। चुम्बकीय शक्ति से कई रोगों के इलाज को संभव बनाया जा चूका है। और भारत में चुम्बकीय चिकित्सा केंद्र भी स्थापित किया जा चूका है।

तो दोस्तों यह रहा एक छोटा सा तरीका अब हम आगे की पोस्ट में चुम्बक कैसे बनता है इसके अन्य तरीकों के साथ साथ प्राकृतिक चुम्बक कैसे बनता है? , चुम्बक के प्रकार , स्थायी चुम्बक , ........... , चुम्बक किस धातु से बनता है। आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

Chumbak kitane prakar ke hote hain?(चुम्बक कितने प्रकार के होते हैं?)- 

चुम्बक के प्रकार की बात करें तो यह दो प्रकार के होते हैं।-
1. प्राकृतिक चुम्बक
2.कृत्रिम चुम्बक

प्राकृतिक चुम्बक क्या है?(Prakritik chumbak kya hai?)-

प्राकृतिक चुम्बक वे चुम्बक होते हैं जो प्रकृति में स्वतन्त्र रूप से पाये जाते हैं इन्हें मनुष्यों के द्वारा नही बनाया जाता है। जैसे- मैग्नेटाइट आदि। इन्हें Lodestone भी कहा जाता है।
इनका चुम्बकत्व प्रबल नही होता है और इनका रूप व आकार अनिश्चित होता है। इसलिए इनका इस्तेमाल प्रायोगिक तथा वैज्ञानिक कार्यों में नही किया जाता है। 

कृत्रिम चुम्बक-

वे चुम्बक जिन्हें कृत्रिम ढंग से बनाया जाता है यानि की जिन्हें मनुष्यों द्वारा बनाया जाता है कृत्रिम चुम्बक कहलाते हैं। ये अधिकांशतः लोहे , इस्पात व निकिल के बनाये जाते हैं। इनका रूप व आकार निश्चित होता है।
कृत्रिम चुम्बक की प्रकार की बात करें तो ये दो प्रकार के होते हैं-
1.स्थायी चुम्बक 
2.अस्थायी चुम्बक

Sthai chumbak kya hai?(स्थायी चुम्बक क्या है?)-

स्थायी चुम्बक जैसा की इनके नाम से ही पता चल रहा है कि इनका चुम्बकत्व स्थायी होता है। लेकिन इनमें चुम्बकीय बल कम शक्तिशाली होता है। इनकी शक्ति नियत रहती है। ये अधिक दिनों तक अपने चुम्बकीय गुणों को बनाये रखते हैं। इन्हें विचुम्बकीत करने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है। ये कठोर चुम्बकीय पदार्थों से बनाये जाते हैं। इनके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं।-
धात्विक चुम्बक(निकिल , कोबाल्ट) , फेराइट चुम्बक , एल्बिको चुम्बक , समेरिम-कोबाल्ट-चुम्बक , नियोडिनियम-आइरन-बोरान चुम्बक , एकल अणु चुम्बक , एकल श्रृंखला चुम्बक , नैनो संरचना चुम्बक आदि।

स्थायी चुम्बक बनाये जाते हैं?

स्थायी चुम्बक बनाने के लिए ऐसे पदार्थ की जरुरत पड़ती है जिनके शैथिल्य वक्र का क्षेत्रफल अधिक हो और जो  चुम्बकत्व धारण करने में कम और विचुम्बकित होने में अधिक समय लें। तो ऐसे पदार्थो में सबसे उपयुक्त स्टील और इस्पात होते हैं। स्टील की धारण शक्ति नर्म लोहे की अपेक्षा बहुत अधिक होती है।

स्थायी चुम्बक बनाने की विधि-

स्थायी चुम्बक बनाने के लिए स्टील , कोबाल्ट व निकिल धातुओं की आवश्यकता पड़ती है। इनको मिश्रित करके यह चुम्बक बनायी जाती है।
इसका उपयोग धारामापी अमीटर , वोल्टमीटर आदि में किया जाता है। DC मोटरों और बड़े-बड़े जनरेटरों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

अस्थायी चुम्बक-

अस्थायी चुम्बक वे चुम्बक होते हैं जिनका चुम्बकत्व स्थायी नही होता है। यानी की कुछ ही समय के लिए होता है। अस्थायी चुम्बक को हम वैद्युत चुम्बक भी कह सकते हैं। इनका चुम्बकीय बल अधिक शक्तिशाली होता है। इसके चुम्बकीय बल को इसकी कुंडली में फेरों की संख्या में परिवर्तन करके बढ़ाया जा सकता है। इनमें धारा के बंद होते ही चुम्बकीय गुण समाप्त हो जाता है। इसलिए इन्हें अस्थायी चुम्बक कहा जाता है। विद्युत् चुम्बक का उपयोग बड़े बड़े कारखानों में भारी सामान को उठाने में किया जाता है। जिस भी सामान को उठाना होता है उस पर लोहे की पटरी बांध दी जाती है। विद्युत् चुम्बक में जैसे ही विद्युत् धारा प्रवाहित करते हैं वह विद्युत् चुम्बक बन जाता है और पटरी से लगे बोझ को आसानी से उठा लेता है। विद्युत् चुम्बक का उपयोग शोधकार्यों में किया जाता है। इसी की सहायता से फैराडे ने प्रकाश संबंधी फैरड प्रभाव , जेमान ने जेमान प्रभाव और केर ने केर प्रभाव का आविष्कार किया।

विद्युत चुम्बक किस पदार्थ के बनाए जाते हैं।-

विद्युत् चुम्बक बनाने के लिए आपके पास एक नर्म लोहे की रॉड और वैद्युतरोधी तांबे का तार होना चाहिए और इन सबके साथ साथ आपके पास वैद्युत धारा की भी जरुरत पड़ेगी।

विद्युत चुम्बक बनाने की विधि- 

                              
Chumbak kaise banta hai

                         

इसमें एक नर्म लोहे की रॉड होती है। जो एक परनालिका या घोड़े की नाल के रूप में मुड़ी होती है। इसके ऊपर तांबे की तार को लपेट देते हैं। इसके बाद जब इसमें वैद्युत धारा को प्रवाहित कराते हैं तो रॉड के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। और यह एक चुम्बक की तरह व्यवहार करने लगता है।

Chumbak ke gun(चुम्बक के गुण)- 

1.चुम्बक चुम्बकीय पदार्थो , लोहे से बनी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण रखता है।

2.एक छड़ चुम्बक को स्वतंत्रता पूर्वक लटकाने पर वह सदैव उत्तर दक्षिण दिशा में ठहरता है।

3.चुम्बक के समान ध्रुवों को पास में लाने पर प्रतिकर्षण तथा असमान ध्रुवों को पास में लाने पर आकर्षण होता है।

4.चुम्बक सदैव N-S युग्म यानी की उत्तरी , दक्षिणी ध्रुव में होते हैं। अकेले इनका अस्तित्व संभव नही होता है।

5.चुम्बक को पटकने पीटने और गर्म करने पर उसका अस्तित्व नष्ट हो जाता है।

6.चुम्बक से विद्युत् को बनाया जा सकता है।

7.सभी चुम्बक में दोनों ध्रूवों की पोल सामर्थ्य बराबर होती है।

8.किसी भी चुम्बक को उसकी संतृप्त अवस्था से अधिक चुम्बकित नही किया जा सकता है। और इसका चुम्बकीय क्षेत्र अदृश्य होता है।

9.यदि चुम्बक के पास कोई दूसरा चुम्बकीय पदार्थ जैसे की लोहा , निकिल , कोबाल्ट को रखा जाये तो इनमें भी चुम्बकीय गुण उत्पन्न हो जा जाता है।

10.किसी भी चुम्बक को यदि टुकड़ो में विभाजित कर दिया जाये तो प्रत्येक टुकड़े में नए ध्रुव उत्पन्न हो जाते हैं।


चुम्बक के उपयोग(Chumbak ke upyog)-

1.चुम्बक के उपयोग से कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर पतली चुम्बकीय परत चढ़ाकर उस पर आंकड़े संरक्षित किये जाते हैं।

2.क्रेडिट कार्ड , डेबिट कार्ड और एटीएम कार्ड आदि में भी चुम्बकीय पट्टी का उपयोग किया जाता है। जिस पर कुछ सूचनाएं दर्ज होती हैं।

3.टीवी और कंप्यूटर के मॉनिटरों में भी इसका उपयोग किया जाता है।

4.चुम्बक का उपयोग ऐसी चीजों को खोजने में किया जाता है जो बहुत छोटी हैं , जीन तक हाथ नहीं पहुँच सकता या फिर जिन्हें आँखों से देखा नही जा सकता।
5.चुम्बक का उपयोग लौह चुम्बकीय अयस्क के प्रकरण में भी किया जाता है।

स्थायी चुम्बक के उपयोग-

स्थायी चुम्बक का उपयोग लाऊड स्पीकर , डायनामो मीटर , चुम्बकीय सुई आदि में किया जाता है।
अस्थायी चुम्बक के उपयोग-
अस्थायी चुम्बक का उपयोग विद्युत् घंटी , विद्युत् मोटर , विद्युत् जनरेटर , MCB , विद्युत् उपकरण आदि में किया जाता है।

चुम्बक के ध्रुव की पहचान आप किस प्रकार करेंगे-

चुम्बक के ध्रुव की पहचान करने के लिए आपके पास एक छड़ चुम्बक होना चाहिये। आपको छड़ चुम्बक को  एक धागे से किसी चीज़ के सहारे स्वतंत्रता पूर्वक लटका देना है। जैसा कि आप जानते ही होंगे चुम्बक में उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव (South pol और North pol) (N-S) होते हैं। जब आप इसे स्वतंत्रता पूर्वक लटका देंगे तो यह उत्तर और दक्षिण दिशा में ठहर जायेगा। जो शिरा उत्तर की ओर होगा वो चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव और जो दक्षिण की ओर होगा वो शिरा चुम्बक का उत्तरी ध्रुव होगा। तो आप इस तरह चुम्बकीय ध्रुव की पहचान कर पाएँगे। 

Conclusion(निष्कर्ष)- 
आज के समय में चुम्बक का इलेक्ट्रॉनिक से लेकर चिकित्सा के क्षेत्र तक बहुत बड़ा योगदान है। चुम्बक कैसे बनता है इसके लगभग सारे तरीकों को बताने का प्रयास मैंने किया है। उम्मीद करता हूँ आपको मेरी यह पोस्ट आपके लिए काफी मददगार साबित होगी। दोस्तों पोस्ट के बीच में मैंने आपको कुछ अन्य पोस्टों की लिंक प्रोवाइड करायी हैं अगर आप चाहे तो उन्हें भी पढ़ सकते हैं। अगर आपको अब भी कोई डाउट है तो हमसे कमेंट में बेझिझक पूछ सकते हैं। हम उसका समाधान करेंगे। धन्यवाद
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