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डी एम दीपक रावत का जीवन परिचय।DM Deepak Rawat biography in hindi.

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DM दीपक रावत एक ऐसा नाम जो अक्सर सुर्खियों में रहता है। आज हम आपको डीएम दीपक रावत की जीवनी [DM Deepak Rawat biography in hindi] के बारे में बताने वाले हैं। DM दीपक रावत का काम और इनका काम करने का तरीका अन्य  IAS Officer से अलग है इनकी यही खासियत इन्हें दूसरे IAS अधिकारियों से अलग बनाती है। ये जँहा पर भी रहते हैं लोग इनके मुरीद हो जाते हैं। आइये DM दीपक रावत का जीवन परिचय देखते हैं। 
                                      
Dm deepak rawat biography in hindi


DM Deepak Rawat biography in Hindi.( डीएम दीपक रावत का जीवन परिचय)


डीएम दीपक रावत का जन्म 24 सितंबर 1977 ईस्वी को मसूरी उत्तराखंड राज्य में हुआ था। इस समय दीपक रावत हरिद्वार के डीएम हैं। इनकी पत्नी का नाम विजेता सिंघ हैं जो की खुद एक मजिस्ट्रेट हैं। इनका एक बेटा है जिसका नाम दिव्यांश और एक बेटी है जिसका नाम दिरिशा है। दीपक रावत क्षत्रिय हैं और इनका धर्म हिन्दू है।

DM दीपक रावत की पढाई की बात करें तो इन्होंने अपनी शुरुआती स्कूल की पढाई St. Georges College Barlowganj massorie से की है और B. A इन्होंने History में हंस राज कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया है। इसके बाद इन्होंने Post Graduation किया है। M. A और M. Phil भी इन्होंने History में जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) से किया है। 

DM दीपक रावत की हॉबीज की बात करें तो इन्हें गाने सुनना , किताबे पढ़ना और क्रिकेट खेलना पसंद है। दीपक रावत धार्मिक प्रवर्ति के आदमी है अक्सर ये धार्मिक स्थलों पर पूंजा अर्चना करने जाया करते हैं। सोशल मीडिया पर भी दीपक रावत काफी समय व्यतीत करते हैं। दीपक रावत का मानना है कि सोशल मीडिया को वह एक Possitive Point मानते हैं। वह लोगों को खुद से जोड़ने और खुद को लोगों से जोड़ने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका मानते हैं। लोग उन्हें सोशल मीडिया पर काफी पसंद भी करते हैं। दीपक रावत जँहा भी रहते हैं लोग उनके मुरीद हो जाते हैं इनके सख़्त निर्णय और घूस खोर अधिकारियों के खिलाफ कड़ा एक्सन इन्हें बाकी आईएएस अधिकारियों से अलग बनाता है। अक्सर इनके वीडियो वायरल हुआ करते हैं। इनकी एक खासियत है कि ये कंही पर भी अचानक पहुँच जाते हैं। दीपक रावत अपने औचक निरीक्षण के लिए भी जाने जाते हैं। जब भी ये किसी दफ्तर का या किसी हॉस्पिटल का या अन्य जगहों का अचानक निरिक्षण करने जाते हैं तो उस निरिक्षण का वीडियो भी ये अपलोड करते हैं Youtube पर इनके बहुत सारे औचक निरीक्षण के वीडियो मिल जायेंगे। आप उन वीडियो में DM Deepak Rawat के काम करने के तरीकों और धांधली , घूसखोरी के खिलाफ इनके शख्त रवैये को देख सकते हैं। 

अक्सर दीपक रावत चर्चा में आया करते हैं 2017 में गूगल पर सर्च किये जाने वाले IAS अधिकारियों में दीपक रावत सबसे ज्यादा सर्च किये जाने वाले IAS अधिकारियों की लिस्ट में टॉप पर थे। 

दीपक रावत कैसे बने डीएम?


दीपक रावत का कहना है कि वह बचपन में पढाई में ज्यादा अच्छे नही थे। इनके मार्क्स अच्छे नही आते थे। इन्होंने बताया है कि इन्हें बचपन में कूड़ा कबाड़ा जमा करने का शौख था कूड़े कबाड़ा जैसे टूथ पेस्ट , बोतल और पुरानी सामने जिन्हें लोग फेंक देते हैं इनको ये इकठ्ठा करते और उसका एक मजमा(ढेर) लगाते थे। जब लोग इनसे पूछते आप क्या बनना चाहते हो तो इनका जवाब रहता था कि मैं कबाड़ी बनना चाहता हूँ। बचपन में इन्हें इलेक्ट्रॉनिक सामने जैसे हीटर , पुरानी घडी आदि को रिपेयर करने का शौख था। 
हालांकि ये पढ़ाई में अच्छे नहीँ थे और इनका मन इलेक्ट्रॉनिक चीजों को रिपेयर करने में ज्यादा लगता था और इन्हें यह सब करना पसंद भी था। 

अपने बेटे की इसी रुझान को देखकर इनके पिता जी ने इनकी एक बिजली रिपेरिंग की दुकान पर बात भी कर ली थी। जैसे तैसे इन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की। बारहवीं तक की पढ़ाई इन्होंने Science स्ट्रीम से की थी इसलिए इनके पिता जी ने इन्हें इंजीनियरिंग करने की सलाह दी पर इन्होंने अपने आप को इसके योग्य नही समझा। मसूरी में  IAS academy  है इसके बारे में दीपक रावत को कुछ भी नही पता था उन्हें एक बस रोज़ दिखाई पड़ती थी जिस पर LSNNA लिखा हुआ करता था। इन्होंने इसके बारे में जानना शुरू किया। लोगों ने बताया कि वँहा पर बड़े अधिकारियों की ट्रेनिंग होती है। इनके पडोसी IPS थे दीपक रावत उनके पास गए और इसके बारे में उनसे पूछा। फाइनली इन्होंने अपने पिता जी से कह दिया की वह इंजीनियरिंग नही करेंगे और दिल्ली जाना चाहते हैं। 
इसके बाद ये दिल्ली चले गए और वँहा पर हँस राज कॉलेज में अपना एडमिशन करा लिया। यँहा पर इनके कई सारे बिहारी दोस्त बन गए। अक्सर बिहार के लोगों में सिविल सर्विसेज का क्रेज़ ज्यादा होता है। इन्हें वँहा पर एक माहौल मिला। अच्छी पढ़ाई इन्होंने वँहा पर की। 
पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दीपक रावत ने JNU में एडमिशन करा लिया। इनकी उम्र उस समय 24 साल की हो गयी थी। कुछ दिन बाद इनके पिता जी का फ़ोन आया और उन्होंने इनको पैसे देने से मना कर दिया इनके पिता जी का कहना था कि वे अब 24 साल के हो गए हैं और अब अपना खर्चा खुद संभाले। दीपक रावत ने पिता जी की बात का बुरा नही माना। 
कुछ दिन बाद ही JRF का Result आ गया उस समय JRF की फिलोशिप 8000 ₹ हर महीने मिलती थी और JNU का खर्च लगभग 1000₹ हर महीने लगता था। इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी शुरुआती 2 प्रयासों में इनका सिलेक्शन नही हुआ तिशरे प्रयास में Custom के आये और last एटेम्पट में इन्होंने क्लियर कर दिया। इन्हें IRS की पोस्ट मिली। इसके बाद इन्होंने फिर एग्जाम दिया और फाइनली IAS की पोस्ट इन्हें मिल गयी। अभी ये हरिद्वार के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं। 
तो दोस्तों यह थी दीपक रावत की लाइफ स्टोरी। आइये कुछ और लोगों का जीवन परिचय पढ़े।


Conclusion-


दोस्तों कैसी लगी डीएम दीपक रावत की बायोग्राफी। डीएम दीपक रावत की लाइफ स्टोरी से आपको बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। इन्होंने कभी भी कोई काम टेंशन लेकर नही किया हमेसा ये अपने काम को एन्जॉय करते हैं और उसे एक खेल की नज़र से देखते हैं। दोस्तों हमे भी अपनी लाइफ में कभी किसी काम को बोझ नही मानना चाहिए और एन्जॉय करते हुए अपने काम को करना चाहिए। उम्मीद है हमारे इस लेख से आपको सीखने को मिला होगा। धन्यवाद!

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